नहले पर दहला | मेरे दोस्त की सुनाई अनोखी गांव की कहानी

“ये कहानी मेरे दोस्त ने मुझे ऐसे सुनाई थी जैसे वो खुद उसका गवाह हो, और मुझे लगा – इसे आप सबसे ज़रूर शेयर करना चाहिए।”
– Ravikesh (Kahaniwala)
🌾 एक आम गांव, एक खास किस्सा
कुछ दिन पहले मेरी मुलाक़ात मेरे बचपन के दोस्त अर्जुन से हुई। पुराने दिनों की बातें करते-करते वो एक किस्सा सुनाने लगा, जो उसके गांव में कुछ महीने पहले ही हुआ था।
कहानी में एक तरफ़ था – चालाक और धोखेबाज़ बृजलाल, दूसरी तरफ़ – बुजुर्ग मगर बेहद होशियार गजाधर बाबा, और बीच में था – एक गांव की भोली-भाली जनता, जो धोखा खाने वाली थी।
🧑🌾 गांव का नाम – पलसौरा
अर्जुन का गांव है – पलसौरा, बुंदेलखंड के बीचोंबीच बसा हुआ एक छोटा सा गांव। सीधी-सादी ज़िंदगी, हरियाली से घिरे खेत, और लोगों में आपसी मेल-जोल।
गांव में सबसे ज़्यादा इज़्ज़त गजाधर बाबा को दी जाती थी – उम्र करीब 75 साल, पर सोच आज के नौजवानों से भी तेज़। पूरे गांव के मामलों में उनकी सलाह आख़िरी मानी जाती थी।
🚶♂️ एक अजनबी का आगमन – बृजलाल
एक दिन गांव में एक अनजाना आदमी आया – बृजलाल यादव। बोलचाल में ऐसी मिठास कि कोई भी प्रभावित हो जाए। वो कहता था कि वो “रूरल डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट” है और गांव में एक शानदार योजना लेकर आया है –
“बकरी पालन योजना – 3 महीने में दोगुना पैसा कमाइए”
गांव के कई लड़के उसकी बातों में आ गए और ₹5,000 से लेकर ₹20,000 तक पैसे दे दिए।
🤔 गजाधर बाबा की चुप्पी और शंका
गजाधर बाबा ने कहा –
“बेटा, जहां लालच है, वहां धोखा भी साथ चलता है।”
लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं मानी। सबने कहा – “बाबा, अब जमाना बदल गया है।”
🕵️♂️ अर्जुन और बाबा का प्लान – असली चेहरा बेनकाब करना
बाबा ने अर्जुन को बुलाया और बृजलाल की असली पहचान पता करने को कहा। नेट पर खोजने पर पता चला – उसके ऊपर पहले से कई स्कैम के केस दर्ज हैं।
फिर एक चाल चली गई – एक फर्जी इन्वेस्टर माखनलाल को भेजा गया जो ₹50,000 लगाना चाहता था।
🎭 बृजलाल का फंसना और वीडियो सबूत
बृजलाल झांसा दे रहा था कि “फार्म बन रहा है…” – और उसी बातचीत का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया गया।
अब **नहले पर दहला** की चाल तैयार थी!
📢 पंचायत का फैसला – सबके सामने पोल खोल
अगले दिन पंचायत बैठी। वीडियो सबके सामने चलाया गया।
बृजलाल की सच्चाई सामने आ गई। उसे सारे पैसे लौटाने पड़े, और गांव छोड़ना पड़ा।
👨⚖️ गजाधर बाबा का संदेश
“लालच सबसे बड़ा शत्रु है। पर हर चालबाज़ को मात देने के लिए होश और सब्र चाहिए। तभी होता है – नहले पर दहला।”
🌱 मुझे इस कहानी से क्या सिखने को मिला
- ✅ बुद्धिमानी उम्र से नहीं, अनुभव से आती है।
- ✅ हर स्कीम में कूदने से पहले सोचिए।
- ✅ बुजुर्गों की चुप्पी में भी बहुत कुछ होता है।
🔗 लोककथा का सार – “नहले पर दहला”
जब कोई आपको हराने आए – और आप उसे उसकी ही चाल में मात दे दें – वही होता है असली दहला!
📚 अगली कहानी का संकेत – “खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे”
अर्जुन ने बताया कि गांव से निकलने के बाद भी बृजलाल ने झूठ फैलाने की कोशिश की – अब अगली कहानी उसी पर होगी।
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