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- 🪔 दिये की आखिरी लौस्थान: एक छोटा सा गाँव — जहाँ पुराने रास्ते हैं, मिट्टी की महक है, और कुछ दिलों में अब भी उम्मीद बाकी है। पात्र: • रामू काका – 65 वर्ष…
- बूढ़ी अम्मा की आख़िरी चिट्ठी – एक अधूरी कहानीगाँव के कोने में बनी पुरानी सी ईंटों वाली कोठरी में रहती थीं श्यामा अम्मा। सफेद झक्क बाल, काँपते हुए हाथ, और आँखों में इंतज़ार की नमी। कोई आता-जाता नहीं…
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