🪔 दिये की आखिरी लौ
स्थान: एक छोटा सा गाँव — जहाँ पुराने रास्ते हैं, मिट्टी की महक है, और कुछ दिलों में अब भी उम्मीद बाकी है। पात्र: • रामू काका – 65 वर्ष के, मिट्टी के दीये बनाने वाले। • आरव – 12 साल का उत्साही बच्चा, जो सब कुछ जानना चाहता है। 🧱 भाग 1: बुझती उम्मीदें…