उम्मीद का अंकुर | ऊँट के मुँह में जीरा

बुंदेलखंड के परसईपुर गाँव की हवा अब कुछ बदलने लगी थी। हरिशंकर का जीवन, जो एक समय धोखे और पछतावे से भरा था, अब भरोसे और सेवा की ओर मुड़ चुका था। गाँव के लोग जो कभी उससे आँख मिलाना भी नहीं चाहते थे, अब उसे “शंकर भइया” कहकर पुकारने लगे थे। गाँव के बच्चे…

किस्मत की बटेर | अंधे के हाथ बटेर लगना

कहानी: किस्मत की बटेर गाँव की पंचायत में जब हरिशंकर ने झुककर माफ़ी माँगी थी, तो न सिर्फ़ उसका सिर, बल्कि उसकी आत्मा भी झुक गई थी। गाँववालों की आँखों में सिर्फ़ क्रोध नहीं था, उसमें विश्वास टूटने का दर्द भी था। उस रात घर लौटते हुए हरिशंकर की आँखों में नींद नहीं, आँसू थे।…

बीजों का सौदागर | जैसा बोओगे, वैसा काटोगे

बुंदेलखंड के “परसईपुर” नामक गाँव में हरिशंकर नाम का एक किसान रहता था। उम्र लगभग 40 वर्ष की होगी, कंधे पर हमेशा गमछा लटका रहता, और चेहरे से पसीना गिरता रहता — लेकिन उसकी आँखों में अब पहले जैसी चमक नहीं थी। खेती करता था, मगर पाँच सालों से सूखा, कीड़े, और फसल खराबी ने…