📖 ज्ञान का चश्मा | गाँव के मास्टरजी बनाम मोबाइल बाबा

  🪔 लोकोक्ति: “घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध” अर्थ: जो व्यक्ति अपने घर या समाज में ज्ञानी होता है, उसकी बातें या सलाहों को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि बाहर से आए किसी अनजान व्यक्ति को बिना जाँचे परखे ही सिद्ध मान लेते हैं। 👥 प्रमुख पात्र: रामबचन मिश्रा: मधुपुरवा…

आ बैल मुझे मार | हरिशंकर और उसकी ज़िद का अंजाम

लोकक्ति: “आ बैल मुझे मार” जब इंसान बिना सोचे-समझे किसी बड़े से टकरा जाए और अपनी ही ज़िद में खुद को मुश्किल में डाल दे, तो यही कहा जाता है – “आ बैल मुझे मार।” परसाइपुर का ज़िद्दी हरिशंकर बुंदेलखंड के छोटे से गाँव परसाइपुर में हरिशंकर नाम का एक आदमी रहता था। अपने आप…

मुखिया की कुर्सी और चपरासी की इज़्ज़त | ऊँचाई पर बैठने से कोई महान नहीं बनता

लोकोक्ति: “ऊँचाई पर बैठने से कोई महान नहीं बनता”अर्थ: केवल ऊँचे पद या रुतबे पर बैठना किसी को महान नहीं बनाता। असली महानता उसके व्यवहार, कर्म और सोच से जानी जाती है। 1. कहानी की शुरुआत – गाँव बकुलीपुर का चुनाव उत्तर प्रदेश के बकुलीपुर गाँव में सरपंच चुनाव होने वाले थे। पूरा गाँव चुनावी…

उम्मीद का अंकुर | ऊँट के मुँह में जीरा

बुंदेलखंड के परसईपुर गाँव की हवा अब कुछ बदलने लगी थी। हरिशंकर का जीवन, जो एक समय धोखे और पछतावे से भरा था, अब भरोसे और सेवा की ओर मुड़ चुका था। गाँव के लोग जो कभी उससे आँख मिलाना भी नहीं चाहते थे, अब उसे “शंकर भइया” कहकर पुकारने लगे थे। गाँव के बच्चे…

किस्मत की बटेर | अंधे के हाथ बटेर लगना

कहानी: किस्मत की बटेर गाँव की पंचायत में जब हरिशंकर ने झुककर माफ़ी माँगी थी, तो न सिर्फ़ उसका सिर, बल्कि उसकी आत्मा भी झुक गई थी। गाँववालों की आँखों में सिर्फ़ क्रोध नहीं था, उसमें विश्वास टूटने का दर्द भी था। उस रात घर लौटते हुए हरिशंकर की आँखों में नींद नहीं, आँसू थे।…

बीजों का सौदागर | जैसा बोओगे, वैसा काटोगे

बुंदेलखंड के “परसईपुर” नामक गाँव में हरिशंकर नाम का एक किसान रहता था। उम्र लगभग 40 वर्ष की होगी, कंधे पर हमेशा गमछा लटका रहता, और चेहरे से पसीना गिरता रहता — लेकिन उसकी आँखों में अब पहले जैसी चमक नहीं थी। खेती करता था, मगर पाँच सालों से सूखा, कीड़े, और फसल खराबी ने…